खुशखबरी! घी-मक्खन की कीमतों में कमी की संभावना, सरकार कर सकती है दामों में बदलाव

घी-मक्खन कीमतें: डेयरी विभाग के प्रस्तावों के आधार पर जल्द हो सकती है कीमतों में कमी। विभाग ने वित्त मंत्रालय को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि घी और मक्खन पर 12% जीएसटी की जगह 5% लगानी चाहिए।

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नयी दिल्ली:

दूध-दही के साथ-साथ घी और मक्खन के दाम भी बढ़ गए हैं. लेकिन सरकार जल्द ही इन दोनों उत्पादों की कीमतें कम करने की तैयारी कर रही है। कहा जा रहा है कि घी और मक्खन पर लगने वाले 12 फीसदी जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी कर दिया जाएगा. इससे इनकी कीमतें करीब 4 फीसदी तक कम हो सकती हैं. यह फैसला दूध की बढ़ती कीमतों के बाद लिया गया है. पिछले 3 साल में दूध की कीमतों में 21.9% की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर चारे की कीमतों पर भी पड़ रहा है.

सरकार ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा घी और मक्खन की कीमतों में कटौती का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा है. इसके साथ ही जीएसटी फिटमेंट कमेटी भी इस मुद्दे पर विचार करने के लिए बातचीत करेगी. डेयरी विभाग ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि अगर घी को लग्जरी उत्पाद माना जाएगा और उस पर 12 फीसदी जीएसटी लगाया जाएगा तो इससे किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा.

भारत में खाद्य तेल की 70% ज़रूरतें आयात से पूरी होती हैं, जिस पर 5% जीएसटी लगाया जाता है। हालांकि, घी और मक्खन जैसे उत्पादों पर दोगुना टैक्स लगता है। वित्त मंत्रालय को पशुपालन विभाग के प्रस्ताव पर विचार करने की सलाह दी जा रही है.

घी पर 12% जीएसटी का मतलब है प्रति किलो 70 रुपये की बढ़ोतरी. एक किलो घी बनाने में 12 से 14 लीटर दूध का इस्तेमाल होता है, जिससे किसानों की कमाई करीब 5 से 6 रुपये बढ़ जाती है, लेकिन 12% जीएसटी के कारण घी के दाम महंगे हो जाते हैं. इससे पता चलता है कि सरकार न सिर्फ उपभोक्ताओं पर टैक्स लगा रही है, बल्कि किसान भी इससे प्रभावित हो रहे हैं.

पिछले साल भी पनीर, दही, लस्सी और छाछ जैसे पैकेज्ड दूध उत्पादों पर 5% टैक्स लगाने का प्रस्ताव जीएसटी काउंसिल को भेजा गया था, लेकिन फिलहाल 12% की दर से जीएसटी वसूला जा रहा है। इसलिए, सोढ़ी का कहना है कि घी और मक्खन पर खाना पकाने के तेल के समान जीएसटी लगना चाहिए, जो कि 5% है। इससे किसानों को उनके उत्पादों का सही दाम मिलेगा और महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा.

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