गहरे बीहड़ जंगल में स्थित है मां शीतला का प्राचीन मंदिर, जहां डकैत भी करते थे आराधना! यहां जानिए इस मान्यता से भरा किस्सा

ग्वालियर से लगभग 20 किलोमीटर दूर, घने जंगलों के बीच, माता शीतला का विशाल मंदिर स्थित है.

माता शीतला मंदिर

भिंड जिले में गोहद के पास बीहड़ों में स्थित शीतला माता मंदिर एक प्राचीन स्थान है जहां हजारों वर्षों से माता शीतला की पूजा की जाती है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है और यह घने जंगलों में स्थित है।

मान्यता के अनुसार यह मंदिर बीहड़ में स्थित होने के कारण कई डाकू भी यहां आकर सिर झुकाते थे। आज भी इस मंदिर पर भारी भीड़ होती है और हर सोमवार को यहां मेला लगता है।

मान्यता है कि मंदिर के चारों ओर पांच समोवार परिक्रमा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। माता शीतला अपने भक्तों को स्वप्न में दर्शन देकर आशीर्वाद देती हैं।

मंदिर के मुख्य पुजारी महंत कमल सिंह ने बताया कि मंदिर का इतिहास गजाधर नाम के भक्त से जुड़ा है. गजाधर की भक्ति से माता प्रसन्न हुईं और माता ने उन्हें अपना स्थान दे दिया। इसके बाद मंदिर का स्थान घने जंगल में तय किया गया, जहां माता शीतला आज भी अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।

घने जंगलों में स्थित होने के कारण, मंदिर तक पहुँचने के लिए व्यक्ति का आधा जीवन यात्रा में व्यतीत हो जाता है, लेकिन भक्तों की भीड़ यहाँ उनके दर्शन को और भी महत्वपूर्ण बना देती है। हर साल नवरात्रि के दौरान माता शीतला के इस पवित्र स्थान पर विशेष पूजा की जाती है और लाखों भक्त यहां आते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

माता के चरण सेवक कमल सिंह भगत ने बताया कि उनके पिता ने पिछले 50 वर्षों से माता के चरणों की सेवा में अपना जीवन बिताया है और अब वह उनका पद संभाल रहे हैं. माता शीतला का यह मंदिर भक्तों के लिए एक पवित्र स्थान है जहां वे अपनी श्रद्धा और भक्ति का अभ्यास करते हैं और माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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