छोटी रिफाइनरी लगाने से देश की मौजूदा क्षमता को 60% बढ़ाने की योजना

पेट्रोल और डीजल उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए बड़ी रिफाइनरियों की बजाय छोटी रिफाइनरियों पर केंद्रित हो रहा है ध्यान

कच्चे तेल कीमतों में तेजी

केंद्र सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल उत्पादन बढ़ाने की भी योजना बनाई है। इसके तहत देश में रिफाइनरियां लगाने की योजना में बदलाव का विचार है. इस बदलाव के तहत बड़ी रिफाइनरियों को छोटी रिफाइनरियों से बदलने का प्रस्ताव है, ताकि भूमि अधिग्रहण की समस्या से निजात मिल सके.

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत को लंबे समय तक रिफाइनरियों की जरूरत रहेगी और वे इनके विस्तार के लिए कई योजनाएं बना रहे हैं. इसके तहत मौजूदा 25 करोड़ मीट्रिक टन सालाना क्षमता को बढ़ाकर 40 करोड़ मीट्रिक टन सालाना करने की योजना है.

भूमि अधिग्रहण की समस्या को देखते हुए छोटी-छोटी रिफाइनरियां स्थापित करने का प्रस्ताव है। ऐसी रिफाइनरियों का सुझाव है कि एक रिफाइनरी के स्थान पर छह करोड़ की वार्षिक क्षमता वाली तीन छोटी रिफाइनरियां स्थापित की जानी चाहिए।

इस संदर्भ में पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश की बीना रिफाइनरी में 50 हजार रुपये की परियोजना का उद्घाटन किया है और सरकारी रिफाइनरी कंपनियां पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में विस्तार कर रही हैं.

अगले पांच साल में भारत में बढ़ेगी ऊर्जा की मांग

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 से 2028 तक भारत में ऊर्जा की मांग सबसे तेज रहेगी, जो पारंपरिक ऊर्जा खपत में बढ़ोतरी का भी संकेत है. इसके अतिरिक्त, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और रिफाइनिंग क्षमता में भी दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है।

भारत में सात वर्षों तक पेट्रोल, डीजल और गैस से चलने वाली कारों की मांग इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग से अधिक बनी रहेगी, जिसका मतलब है कि पेट्रोलियम उत्पादों के लिए रिफाइनरी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी।

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