पश्चिमी यूपी में भाजपा के साथ चंद्रशेखर रावण की भूमिका सस्पेंस में, नए सूट और चावल-खीर से जयंत ने बढ़ाया उत्सुकता

पश्चिमी यूपी में भाजपा के साथ चंद्रशेखर रावण की भूमिका सस्पेंस में, नए सूट और चावल-खीर से जयंत ने बढ़ाया उत्सुकता

पश्चिमी यूपी में भाजपा के साथ चंद्रशेखर रावण की भूमिका सस्पेंस में

भाजपा की रणनीति इलाकेवार प्रभावी दलों और क्षत्रपों को साधने पर निर्भर है। पूरब के बाद अब पश्चिम में भी पार्टी ने इस रणनीति को अपनाया है। पश्चिमी यूपी में तमाम सीटों पर जाटव वोट बैंक निर्णायक स्थिति में है। बीते करीब ढाई दशक से इस वोट बैंक पर बसपा का प्रभाव रहा है। मगर 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक प्रयोग किया जिसने उन्हें सफलता दिलाई और योगी आदित्यनाथ सरकार को दोबारा सत्ता में लाने में मदद की।

2022 में सफल रहा भाजपा का प्रयोग:
भाजपा ने आगरा की दोनों आरक्षित सीटों छावनी व आगरा ग्रामीण पर पहली बार जाटव प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया और पार्टी ने जिले की नौ सीटों की जीत हासिल की। अलीगढ़ में इगलास की रिजर्व सीट से राजकुमार जाटव, खुर्जा से मीनाक्षी जाटव, हापुड़ से विजयपाल जाटव, कन्नौज से असीम अरुण, रामपुर की मिलक से राजबाला, सहारनपुर की रामपुर मनिहारन से भी भाजपा के जाटव प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। पहली बार सहारनपुर देहात की सामान्य सीट से जाटव समाज के जगपाल सिंह को मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत दर्ज की। जाटवों को रिझाने के लिए ही भाजपा ने असीम अरुण और बेबीरानी मौर्य को मंत्रिपद दिया। पुलिस सेवा छोड़कर भाजपा को ज्वाइन करने वाले असीम को पार्टी ने गाजियाबाद व हाथरस के प्रभारी का दायित्व दिया।

पश्चिम में साझा कदमताल कर रही जोड़ी:
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर भी इसी जाति से आते हैं। धीरे-धीरे वे पश्चिमी यूपी में ताकत बढ़ाने में जुट रहे हैं। जयंत और चंद्रशेखर की जोड़ी पश्चिम में साझा कदमतकरती नजर आ रही है। इसके अलावा, भाजपा ने अपनी सियासी ताना-बाना बुनने के लिए भी कदम उठाए हैं।

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