भूजल पर निर्भरता कायम, लेकिन लघु सिंचाई में वृद्धि

लघु सिंचाई योजनाओं में उत्तर प्रदेश का अग्रणी स्थान; भारत में सिंचाई के साधनों की वृद्धि

भूजल पर निर्भरता

नई दिल्ली:

देश में सिंचाई के साधन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही भूजल पर निर्भरता की चुनौती भी बनी हुई है। लघु सिंचाई योजनाओं की छठी जनगणना के अनुसार, भूजल और सतही जल पर आधारित भारतीय सिंचाई संसाधनों में 14.2 लाख की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कोरोना महामारी के कारण छठी जनगणना के आंकड़े जारी होने में थोड़ी देरी हुई है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

यह गणना 2013-14 से 2017-18 तक की है और जल शक्ति मंत्रालय के मुताबिक यह गणना सिंचाई के साधनों के महत्व को उजागर करने के लिए की गई है. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 2.31 करोड़ लघु सिंचाई योजनाएँ हैं, जिनमें से 94.8 प्रतिशत (2.19 करोड़) योजनाएँ भूजल आधारित हैं और केवल 5.2 प्रतिशत (12.1 लाख) योजनाएँ सतही जल पर आधारित हैं।

कौन-कौन सी योजनाएं शामिल हैं?

पांचवीं गणना में देश में कुल 2.17 करोड़ लघु सिंचाई योजनाएं पंजीकृत थीं। इनमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, उसके बाद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु हैं। उत्तर प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत लघु सिंचाई योजनाएँ हैं, जिनका उपयोग विभिन्न तरीकों से कृषि भूमि की सिंचाई के लिए किया जाता है। लघु सिंचाई योजनाओं में खोदे गए कुएं, गहरे और उथले ट्यूबवेल और मध्यम प्रौद्योगिकी योजनाएं शामिल हैं।

सतही जल से संबंधित योजनाएँ:

सतही जल पर आधारित योजनाओं में सतही लिफ्ट योजनाएं शामिल हैं, जिनका उपयोग पानी उठाने के लिए किया जाता है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना भूजल आधारित योजनाओं में सबसे आगे हैं। दूसरी ओर, सतही जल से जुड़ी योजनाओं में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड की हिस्सेदारी अधिक है।

लघु सिंचाई योजनाओं में खोदे गए कुओं का महत्व:

रिपोर्ट के अनुसार, पांचवीं जनगणना के अनुसार भूजल और सतही जल सिंचाई स्रोतों में 6.9 प्रतिशत और 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लघु सिंचाई योजनाओं में खोदे गए कुओं का हिस्सा सबसे अधिक है। गहरे ट्यूबवेल के मामले में पंजाब अग्रणी है, लेकिन भूजल स्तर के मामले में उत्तर प्रदेश को लेकर चिंता हो सकती है।

राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के मामले में यह देखा गया है कि इन राज्यों में पानी का दोहन उपलब्ध जल संसाधनों से अधिक है। अधिकांश लघु सिंचाई योजनाएं निजी स्वामित्व में हैं और इनमें से 18.1 प्रतिशत का स्वामित्व महिलाओं के पास है।

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