मणिपुर: आदिवासी समूहों के आरोपों पर NIA और CBI का बयान आधारित गिरफ्तारियों की जांच

एनआईए और सीबीआई पर मनमानी के आरोप पर मणिपुर में आदिवासी समूहों का प्रतिबद्ध विरोध, सरकार का जवाब

मणिपुर आदिवासी गिरफ्तारियां

पीटीआई, इंफाल:

इस साल मई से मणिपुर में जातीय झड़पें बढ़ रही हैं, जिसके चलते केंद्रीय एजेंसियों को गिरफ्तारियां करनी पड़ रही हैं। आदिवासी समूहों ने एनआईए और सीबीआई पर मनमानी का आरोप लगाया है, लेकिन सरकार के मुताबिक यह सबूतों पर आधारित है. जांच एजेंसियों ने कहा कि गिरफ्तारियां आरोपियों के धर्म, संप्रदाय या समुदाय के खिलाफ नहीं थीं, बल्कि केवल भारतीय दंड संहिता के नियमों का पालन किया गया था। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गिरफ्तारियां नियामक और न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएं।

जांच एजेंसियों ने कहा कि एनआईए और सीबीआई अधिकारियों को 2015 में सेना के जवानों पर हुए हमलों सहित कई मामलों की जांच करने के कठिन कार्य का सामना करना पड़ रहा है। इन मामलों में आरोप आदिवासी समूह संघर्ष और इसकी विविधता से संबंधित हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने आख़िरकार और न्याय की दृष्टि से काम किया है और उनका मानना ​​है कि सभी आरोपों की पूरी तरह से जांच करना महत्वपूर्ण है।

आदिवासी समूहों ने विरोध प्रदर्शन किया है और एनआईए और सीबीआई पर मनमानी का आरोप लगाया है. उनका दावा है कि आरोप उनके समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए लगाए गए हैं, जिससे वह इनकार करते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आदिवासी समुदायों के प्रति भावनात्मक संवेदनशीलता और अन्यायपूर्ण नियमों के खिलाफ कार्रवाई के खिलाफ भी अपनी आवाज उठाई है। जांच एजेंसियों ने इससे इनकार किया है और कहा है कि उनकी कार्रवाई भारतीय दंड संहिता के नियमों के मुताबिक ही है.

यह भी पढ़ें

Read More Latest News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *