वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात की, कर्ज वसूली के तंत्र से नाराजगी जताई

वित्तमंत्री ने बैंकों के कर्जे और एनपीए की वसूली को लेकर चिंता जताई, सार्वजनिक क्षेत्र में कदम उठाने का आदान-प्रदान किया

कर्ज वसूली

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

शनिवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ हुई बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऋण वसूली तंत्र पर नाखुशी जाहिर की. इस अवसर पर उन्होंने बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात की और उनसे नए उपायों और कार्यों की आवश्यकता पर चर्चा की।

वित्त मंत्री बैंकों में फंसे कर्ज यानी एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) के घटते स्तर को लेकर खासे चिंतित हैं. संसद में भी उन्हें पुराने एनपीए की वसूली या बट्टे खाते में डाले गए एनपीए को लेकर कई सवालों का सामना करना पड़ता है. उनका कहना है कि एनपीए कम करने में सफलता मिली है, लेकिन इसकी रिकवरी में भी सुधार की जरूरत है.

बैंकिंग उद्योग के सूत्रों के अनुसार, एनपीए व्यवस्था में केवल एक ही वसूली प्रक्रिया है जिस पर कुछ करने की जरूरत है। इसी संदर्भ में हाल ही में दिवाला कानून (आईबीसी) ने कर्ज वसूली की एक नई प्रणाली पर काम करना शुरू किया है, लेकिन इसका प्रदर्शन डीआरटी (ऋण वसूली प्राधिकरण) से कम है, जिसमें बैंकों का एनपीए सबसे ज्यादा उलझा हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022-23 में कुल 8,36,898 करोड़ रुपये का कर्ज वसूला गया है, जिसमें से DRT का 4,02,636 करोड़ रुपये का कर्ज है. इसके बावजूद बैंकों का एनपीए डीआरटी में फंसा हुआ है, जिसे कम करने की कोशिशें जारी हैं. IBC के माध्यम से ऋण वसूली का स्तर 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 40.3 प्रतिशत हो गया है, लेकिन इसका केवल 18 प्रतिशत ही IBC के पास है।

आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में बैंकों के कुल 1.44.94 करोड़ लोन मामले हैं, जिनमें से डीआरटी और लोक अदालतों में 1.43.07 करोड़ मामले हैं। इस संदर्भ में वित्त मंत्री स्थिति से असंतुष्ट हैं और उनका कहना है कि वर्ष 2022-23 में उपरोक्त व्यवस्थाओं से ऋण वसूली में गिरावट आएगी।

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